'गूगल टैक्स' के नाम से मशहूर इक्वलाइजेशन लेवी (EQL) भारत में लागू हो गया है। इसके तहत भारत में अगर कोई विदेशी कंपनी की वेबसाइट पर कोई ऑनलाइन विज्ञापन देता है और यह एक लाख से अधिक होता है तो उसे 6% का अतिरिक्त टैक्स देना होगा। गूगल टैक्स ने ऑनलाइन दुनिया में खलबली मचा दी है।
यानी अब गूगल और फेसबुक पर कंपनियों का विज्ञापन करना महंगा हो जाएगा। यही नहीं इस प्लेटफॉर्म पर विज्ञापन करने वालों को भारत सरकार के खाते में भी पैसे पहुंचाने होंगे।
डिजिटल दुनिया में हो रहे मुनाफे पर टैक्स लगाने की ये सरकार की पहली कोशिश है। सरकार की कोशिश है कि कंपनियों को इंटरनेट पर विज्ञापनों से होने वाले फायदे पर वो टैक्स लगाए। यूरोप के कई देशों की सरकारें ऐसा ही टैक्स लगाती हैं।
सरकार जहां स्टार्टअप इंडिया मिशन के तहत छोटी कंपनियों को बढ़ावा दे रही थी, वहीं गूगल टैक्स के कारण्ा उनकी पेचीदगियां बढ़ेंगी।
ऐसी कंपनियों के बीच जो उत्साह था अब वो फीका पड़ सकता है। फिलहाल इसे डिजिटल विज्ञापनों की श्रेणी के लिए लगाया गया है। लेकिन उम्मीद ये की जा रही है कि इसे दूसरी सर्विस के लिए भी बढ़ाया जा सकता है।
गूगल टैक्स लगाकर सरकार ऑनलाइन बिजनस पर अपनी नज़र रख कर कमाई का भी स्रोत बनाना चाहती है। चूंकि गूगल, फेसबुक या दूसरी कंपनियां भारत में सर्विस पर टैक्स नहीं देती हैं या नहीं के बराबर देती हैं, इसलिए सरकार को आम बोलचाल में कहे जाने वाले 'गूगल टैक्स' का रास्ता अख्तियार करना पड़ा।
सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ एक्साइज एंड कस्टम्स की टैक्स रिसर्च यूनिट ने ऐसी कई और सर्विस की सूची तैयार की है जिसपर आने वाले दिनों में टैक्स लगाया जा सकता है।
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